ज़कात कैलकुलेटर

अपनी सालाना ज़कात (2.5%) की गणना कुछ आसान स्टेप्स में करें

1️⃣ नकद और बैंक राशि

2️⃣ सोना और चांदी

सोने का कुल मूल्य: ₹0

चांदी का कुल मूल्य: ₹0

3️⃣ निवेश और व्यापारिक संपत्ति

4️⃣ देनदारियां

6️⃣ पिछला साल की बकाया ज़कात

अगर पिछला साल अदा नहीं किया तो यहाँ जोड़ें।

5️⃣ निसाब विकल्प

सोना निसाब = 87.48 ग्राम × बाज़ार क़ीमत

चांदी निसाब = 612.36 ग्राम × बाज़ार क़ीमत

गौर फ़रमाएं: यह टूल ज़कात अल-माल की गणना करता है। आपकी खालिस दौलत एक क़मरी साल (हौल) तक निसाब से ऊपर होनी चाहिए।

  1. अगर किसी के पास सिर्फ सोना हो तो ज़कात सिर्फ सोने के निसाब के अनुसार होगी ।
  2. अगर किसी के पास सिर्फ चांदी हो तो ज़कात सिर्फ चांदी के निसाब के अनुसार होगी ।
  3. अगर चांदी, नकद पैसा या व्यापार का माल हो तो चांदी के निसाब के अनुसार होगी क्यूंकि चांदी का निसाब जल्दी पहुंच जाता है।

📊 परिणाम

कुल संपत्ति ₹0
जुमला देनदारियां ₹0
खालिस दौलत ₹0
निसाब हद ₹0
ज़कात देय राशि (2.5%) ₹0

यह कैलकुलेटर कैसे काम करता है

इस्तेमाल किया गया फ़ॉर्मूला: (कुल ज़कात योग्य संपत्ति − देय देनदारियां) × 2.5%। ज़कात तब लाज़िम होती है जब आपकी खालिस दौलत निसाब के बराबर या उससे अधिक हो और एक क़मरी साल तक बनी रहे।

निसाब प्रकार वजन आधार मकसद
सोना निसाब 87.48 ग्राम ऊंची हद
चांदी निसाब 612.36 ग्राम कम सीमा (आमतौर पर मुनासिब)

क्या शामिल करें और क्या नहीं

  • शामिल करें: नकद, बैंक बचत, सोना/चांदी, निवेश, बिजनेस स्टॉक।
  • शामिल न करें: मुख्य निवास, क्रिप्टो, डिजिटल मुद्रा, निजी उपयोग की गाड़ी, घरेलू सामान, बिक्री के लिए नहीं होने वाले उपकरण।
  • देनदारियां: देय रकम घटाएं।

फ़ौरी सवाल-जवाब

क्या यह कैलकुलेटर ज़कात अल-फित्र के लिए है?

नहीं। यह कैलकुलेटर सालाना ज़कात अल-माल (माल की ज़कात) के लिए है, ज़कात अल-फ़ित्र के लिए नहीं।

क्या मैं नियत तिथि से पहले ज़कात दे सकता/सकती हूँ?

हाँ, पहले अदायगी करना आम तौर पर जायज़ है। बिना मुनासिब वजह ताख़ीर करना दुरुस्त नहीं है।

क्या मैं परिवार को ज़कात दे सकता/सकती हूँ?

मुनासिब विस्तारित रिश्तेदार (जैसे भाई-बहन, चचेरे/ममेरे रिश्तेदार) पात्र होने पर ज़कात ले सकते हैं। जीवनसाथी, माता-पिता या बच्चों को ज़कात नहीं दी जा सकती।

क्या प्रॉपर्टी पर ज़कात देनी होती है?

यदि प्रॉपर्टी बेचने (निवेश या व्यापार) के इरादे से खरीदी गई हो, तो उसकी मौजूदा बाजार कीमत पर ज़कात देना जरूरी है। लेकिन अगर प्रॉपर्टी रहने के लिए या केवल रखने (बिना बेचने के इरादे) के लिए ली गई है, तो उस पर ज़कात नहीं है।